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गुरुवार, 22 जून 2017

मेरे मन की



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शुक्रिया

रविवार, 11 जून 2017

चन्द माहिया : क़िस्त 41

चन्द माहिया: क़िस्त 41

:1:

सदक़ात भुला मेरा
एक गुनह तुम को
बस याद रहा मेरा

:2:
इक चेहरा क्या भाया
हर चेहरे में वो
मख़्सूस नज़र आया

;3:
कर देता है पागल 
जब जब साने से
ढलता है तेरा आँचल

:4:
उल्फ़त की यही ख़ूबी
पार लगी उसकी
कश्ती जिसकी  डूबी

:5:
इतना ही समझ लेना
मै हूँ तो तुम हो
क्या और सनद देना


-आनन्द.पाठक-
08800927181
शब्दार्थ
सदक़ात  = [सदक़ा का बहु वचन] अच्छे कार्य  सत्कर्म .दान , न्यौछावर आदि
मख़्सूस   = ख़ास तौर से
साने से    = कंधे से
सनद       = प्रमाण-पत्र

शनिवार, 10 जून 2017

♥कुछ शब्‍द♥: तलाश___|||

♥कुछ शब्‍द♥: तलाश___|||: वह बेज़ान पड़ी घूर रही है घर की दीवारों को कभी छत को कभी उस छत से लटक रहे पंखे को उसकी नजरें तलाश रहीं है आज  उन नजरों में परवाह जरा सी अपने ...

शनिवार, 3 जून 2017

♥कुछ शब्‍द♥: इक सफर___|||

♥कुछ शब्‍द♥: इक सफर___|||: मासूम सा प्रेम मेरा  परिपक्य हो गया  वक़्त के थपेड़ो से  सख्त हो गया  किया न गया तुमसे कदर इस दिल का  आंखे देखों मेरी  सुखकर बंजर हो ग...

गुरुवार, 1 जून 2017

एक ग़ज़ल : ज़िन्दगी न हुई----

एक ग़ज़ल : ज़िन्दगी ना हुई बावफ़ा आजतक------

ज़िन्दगी   ना  हुई  बावफ़ा आज तक
फिर भी शिकवा न कोई गिला आजतक

एक चेहरा   जिसे  ढूँढता  मैं  रहा
उम्र गुज़री ,नहीं वो मिला  आजतक

दिल को कितना पढ़ाता मुअल्लिम रहा
इश्क़ से कुछ न आगे पढ़ा  आजतक

एक जल्वा नुमाया  कभी  ’तूर’ पे
बाद उसके कहीं ना दिखा आज तक

आप से क्या घड़ी दो घड़ी  मिल लिए
रंज-ओ-ग़म का रहा सिलसिला आजतक

  एक निस्बत अज़ल से रही आप से
राज़ क्या है ,नहीं कुछ खुला आजतक

तेरे सजदे में ’आनन’ कमी कुछ तो है
फ़ासिला क्यों नहीं कम हुआ आजतक ?


-आनन्द.पाठक--
08800927181

शब्दार्थ
मुअल्लिम =पढ़ानेवाला ,अध्यापक
नुमाया = दिखा/प्रकट
तूर = एक पहाड़ का नाम जहाँ ख़ुदा
ने हजरत मूसा से कलाम [बात चीत] फ़र्माया था
निस्बत =संबन्ध
अज़ल =अनादि काल से

बुधवार, 31 मई 2017

Laxmirangam: निर्णय ( भाग 2)

Laxmirangam: निर्णय ( भाग 2): निर्णय (भाग 2)                                                   (भाग 1 से आगे) रजत भी समझ नहीं पा रहा था कि कैसे अपनी भावना संजना ...

मंगलवार, 30 मई 2017

ज्वालादेवी से धर्मशाला (Jwaladevi to Dharamshala)

ज्वालादेवी से धर्मशाला (Jwaladevi to Dharamshala)


कल पूरे दिन के सफर की थकान और बिना खाये पूरे दिन रहने के बाद रात को खाना खाने के बाद जो नींद आयी वो एक ही बार 4:30 बजे मोबाइल में अलार्म बजने के साथ ही खुला। बिस्तर से उठकर जल्दी से मैं नहाने की तैयारी में लग गया। फटाफट नहा-धोकर तैयार हुआ और सारा सामान पैक किया। इतना करते करते 5 :30 बज गए। अब कल की योजना के मुताबिक एक बार फिर माँ ज्वालादेवी के दर्शन के लिए चल दिया। बाहर घुप्प अँधेरा था। इक्का-दुक्का लोग ही मंदिर के रास्ते पर मिल रहे थे। कुछ देर में हम मंदिर पहुँच गए। यहाँ मुश्किल से इस समय 25 -30 लोग ही थी। अभी मंदिर खुलने में कुछ समय था। कुछ देर में आरती आरम्भ हो गयी। आरती समाप्त होते होते मेरे पीछे करीब 300 से 400 लोगों की भीड़ जमा हो चुकी थी।